- HelloCities24 स्पेशल
- Home
- Shravani Mela Live
- एजुकेशन
- ऑटो
- कोलकाता
- क्राइम
- खेल
- जनरल नॉलेज न्यूज
- जमशेदपुर
- झारखंड
- टेक्नोलॉजी
- धनबाद
- धर्म
- नौकरी न्यूज
- पटना
- पश्चिम बंगाल
- पूर्णिया
- पॉलिटिक्स
- बड़ी खबर
- बिजनेस
- बिहार
- बिहार चुनाव
- बॉलीवुड
- बोकारो
- भागलपुर
- भोजपुरी सिनेमा
- मनोरंजन
- मुजफ्फरपुर
- मौसम
- रांची
- राज्य
- राशिफल
- राष्ट्रीय
- रिजल्ट
- लाइफ स्टाइल
- वर्ल्ड
- वीडियो

Petrol : भारत में 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) की देशव्यापी बिक्री को लेकर नया विवाद सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में इस ईंधन के अनिवार्य इस्तेमाल को चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि यह कदम कई वाहन चालकों के लिए समस्याएँ पैदा कर सकता है.
वाहन चालकों पर बढ़ती मजबूरी
अधिवक्ता अक्षय द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि अधिकांश वाहन चालक पेट्रोल पंपों पर ई-20 खरीदने के लिए बाध्य महसूस कर रहे हैं. उनका तर्क है कि वाहन निर्माता सभी वाहनों के लिए इस ईंधन की अनुकूलता सुनिश्चित नहीं कर रहे हैं. याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी स्टेशनों पर इथेनॉल-मुक्त पेट्रोल (ई0) आसानी से उपलब्ध हो.
इसे भी पढ़ें-ऑनलाइन गेमिंग पर कड़ा कानून: कमाई पर तीन साल की जेल; 1 करोड़ का जुर्माना, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी
वाहन अनुकूलता पर खतरे
याचिका में बताया गया है कि 2023 से पहले निर्मित कार और दोपहिया वाहन ई-20 के लिए उपयुक्त नहीं हैं. कुछ बीएस-VI मॉडल भी इससे प्रभावित हो सकते हैं. इससे इंजन में जंग, माइलेज में कमी और वाहन की प्रदर्शन क्षमता पर असर पड़ सकता है.
उपभोक्ता अधिकार और पारदर्शिता
याचिकाकर्ता ने सुझाव दिया है कि पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को उनके वाहन के लिए इथेनॉल अनुकूलता की स्पष्ट जानकारी दी जाए. इथेनॉल की मात्रा के बारे में लेबलिंग जरूरी है ताकि खरीदार सही विकल्प चुन सकें.
आर्थिक और बीमा संबंधी प्रभाव
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि ई-20 के इस्तेमाल से इंजन मरम्मत का खर्च बढ़ रहा है, जबकि बीमा कंपनियां इथेनॉल से हुए नुकसान के दावे स्वीकार नहीं कर रही हैं. इससे वाहन मालिकों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ रहा है.
सरकार की ईंधन नीति पर चुनौती
ई-20 पेट्रोल को पर्यावरण सुरक्षा के दृष्टिकोण से लागू किया गया था, लेकिन तकनीकी और उपभोक्ता अनुकूलता के मुद्दों ने इसे विवादास्पद बना दिया है. अब यह सुप्रीम कोर्ट पर निर्भर करेगा कि इस मामले में क्या दिशा तय होती है.
इसे भी पढ़ें-
भागलपुर DM ने सदर SDO कार्यालय में SIR कार्यों का लिया जायजा
पीरपैंती में 100 परिवारों तक पहुंची मुर्गी विकास योजना, 2475 चूजों का वितरण