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Dhanbad News: नॉन-अटेंडिंग स्कूलों पर सीबीएसई की सख्ती, बढ़ी प्रबंधन की टेंशन

नॉन-अटेंडिंग स्कूलों पर सीबीएसई की सख्ती
नॉन-अटेंडिंग स्कूलों पर सीबीएसई की सख्ती

धनबाद | संवाददाता : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने उन स्कूलों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जहां छात्र नियमित कक्षाओं में शामिल नहीं होते. हाल ही में रांची के एक बड़े स्कूल में टीम की औचक जांच के बाद अब धनबाद के स्कूलों में भी हलचल मच गई है.

यहां कई ऐसे संस्थान हैं जहां नर्सरी से लेकर आठवीं तक छात्र संख्या सीमित रहती है, लेकिन नौवीं से बारहवीं तक अचानक दाखिले बढ़ जाते हैं. बोर्ड को संदेह है कि ये स्कूल ‘डमी एडमिशन’ के जरिए केवल परीक्षा दिलाने का काम कर रहे हैं, जबकि कक्षा शिक्षण नगण्य है.

अभिभावक और स्कूल आमने-सामने

बोर्ड की सख्ती के बाद कई स्कूल प्रबंधन अब अभिभावकों को फोन कर छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य करने की बात कह रहे हैं. दूसरी ओर, कुछ अभिभावक मानते हैं कि उन्होंने अधिक शुल्क इसी वजह से चुकाया था ताकि उनके बच्चे कोचिंग पर ध्यान दे सके और स्कूल की पढ़ाई में उपस्थिति जरूरी न हो.

75% उपस्थिति का नियम

धनबाद के 65 सीबीएसई संबद्ध स्कूलों में फिलहाल 10वीं और 12वीं तक की पढ़ाई होती है. बोर्ड ने सभी को साफ निर्देश दिया है कि किसी भी छात्र को परीक्षा में बैठने के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी. केवल चिकित्सकीय कारण या राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर ही 25 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है, वह भी प्रामाणिक दस्तावेजों के आधार पर.

मान्यता खतरे में

सीबीएसई ने चेतावनी दी है कि निरीक्षण में गड़बड़ी पाए जाने पर न केवल छात्रों को परीक्षा से बाहर किया जाएगा, बल्कि स्कूल की मान्यता भी रद्द हो सकती है. इस सख्ती ने धनबाद के कई स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों की परेशानी बढ़ा दी है.

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BAU की बड़ी खोज; आम की गुठलियों से बनेगा हाइड्रोजेल, किसानों की बढ़ेगी आमदनी

आम की गुठलियों से बनेगा हाइड्रोजेल
आम की गुठलियों से बनेगा हाइड्रोजेल

भागलपुर | सबौर : आम खाने के बाद उसकी गुठली को लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन अब यही गुठलियां खेती में क्रांति ला सकती हैं. बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर के वैज्ञानिकों ने आम की गुठलियों से बायोडिग्रेडेबल हाइड्रोजेल बनाने में सफलता पाई है. इस हाइड्रोजेल की खासियत है कि यह मिट्टी में पानी रोकने और जरूरत पड़ने पर पौधों को धीरे-धीरे उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है.

केंद्र से मिली मान्यता

बीएयू की इस अनूठी खोज को केंद्र सरकार से पेटेंट भी मिल चुका है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक न सिर्फ टिकाऊ खेती को बढ़ावा देगी बल्कि किसानों की आय और जल संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती देगी.

खेतों में बनेगा ‘नमी बैंक’

जानकारी के अनुसार, आम की गुठली से तैयार हाइड्रोजेल अपने वजन से 400 से 500 गुना तक पानी सोख सकता है. खेत की मिट्टी में मिलाने पर यह नमी को लंबे समय तक सुरक्षित रखता है और पौधों को धीरे-धीरे उपलब्ध कराता है. इससे सिंचाई पर होने वाला खर्च घटेगा और सूखा प्रभावित इलाकों में भी फसल को बचाना आसान हो जाएगा.

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गुठली से नई अर्थव्यवस्था की शुरुआत

भारत में हर साल लगभग 4 करोड़ टन आम पैदा होते हैं, जिनसे 40–50 लाख टन गुठलियां निकलती हैं. अब तक इन्हें व्यर्थ माना जाता था, लेकिन हाइड्रोजेल बनने से इसका मूल्य कई गुना बढ़ सकता है. एक टन गुठली से 100–120 किलो कर्नेल पाउडर निकलता है, जबकि हाइड्रोजेल में बदलने पर इसकी कीमत 5 से 7 गुना तक बढ़ सकती है.

किसानों की आय में होगा इजाफा

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि बिहार और पूर्वी भारत की केवल 25 प्रतिशत गुठलियों का भी उपयोग किया जाए, तो हर साल 300 से 400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को मिल सकती है. यह हाइड्रोजेल पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल और बायोडिग्रेडेबल है, जिससे खेती को टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी.

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Mayank Singh News: गैंगस्टर ने अदालत में कहा- ‘मैं मयंक नहीं’, जेल भेजा गया

गैंगस्टर ने खुद को मयंक सिंह मानने से किया इंकार
गैंगस्टर ने खुद को मयंक सिंह मानने से किया इंकार

Mayank Singh News: झारखंड एटीएस के हत्थे चढ़ा कुख्यात गैंगस्टर मयंक सिंह उर्फ सुनील कुमार मीणा शनिवार को भारी सुरक्षा घेरे में रामगढ़ अदालत में पेश किया गया. एंटी लैंड माइंस वाहन से लाए गए आरोपी ने जज के सामने खुद को निर्दोष बताते हुए दावा किया कि वह मयंक सिंह नहीं है. उसने कहा, इस नाम का कोई और व्यक्ति होगा.

अपर न्यायिक दंडाधिकारी संदीप बर्मन की अदालत में एटीएस और बचाव पक्ष के वकील के बीच लंबी दलीलें चलीं. हालांकि एटीएस की रिमांड की मांग को कोर्ट ने ठुकरा दिया और आरोपी को सीधे रामगढ़ उपकारा भेजने का आदेश दिया.

रेड कॉर्नर नोटिस पर हुई थी गिरफ्तारी

सुनील मीणा पर रामगढ़ और पतरातू थाने समेत झारखंड के कई जिलों में गंभीर मामले दर्ज हैं. रंगदारी और आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए एटीएस ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया था. इसी आधार पर उसे अक्टूबर 2024 में अजरबैजान से दबोच लिया गया. प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शनिवार को उसे रांची लाकर कोर्ट में पेश किया गया.

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राजस्थान से लेकर झारखंड-पंजाब तक फैला अपराध नेटवर्क

गैंगस्टर मूल रूप से राजस्थान के नयी मंडी थाना क्षेत्र, जीडीएस पुरानी मंडी घड़ासाहन का रहने वाला है. उस पर 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं. झारखंड के अलावा राजस्थान और पंजाब में भी उसके खिलाफ कई केस चल रहे हैं.

अमन साहू और लॉरेंस बिश्नोई से था कनेक्शन

सूत्रों के अनुसार, आरोपी का झारखंड के कुख्यात अपराधी अमन साहू और इंटरनेशनल गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से संपर्क रहा है. यह आपसी सहयोग से रंगदारी और अन्य अपराधों को अंजाम देते थे. कुछ महीने पहले पुलिस मुठभेड़ में अमन साहू मारा गया था.

झारखंड पुलिस के इतिहास में पहला सफल प्रत्यर्पण

अजरबैजान से आरोपी को लाने वाली एटीएस टीम की अगुवाई एसपी ऋषभ कुमार झा ने की. उन्होंने बताया कि यह झारखंड पुलिस के इतिहास में पहला सफल प्रत्यर्पण है. झा के मुताबिक, अब अन्य फरार अपराधियों को भी इसी प्रक्रिया के जरिए भारत लाने की कोशिश होगी. उन्होंने कहा कि यह सफलता पुलिस मुख्यालय, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयास का नतीजा है.

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कसबा हादसा: मंत्री लेशी सिंह ने पहुंचकर परिजनों को दिलाया सहारा, मिली 4-4 लाख की मदद

मंत्री लेशी सिंह ने पहुंचकर परिजनों को दिलाया सहारा
मंत्री लेशी सिंह ने पहुंचकर परिजनों को दिलाया सहारा

Purnia News : कसबा नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड 24 स्थित सुभाष नगर मोहल्ले में शुक्रवार को कोसी नदी धार में डूबकर 5 लोगों की मौत हो गई थी. हादसे के बाद शनिवार को बिहार सरकार की खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह मौके पर पहुंचीं. उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया और कहा कि इस कठिन घड़ी में सरकार हर परिवार के साथ खड़ी है.

मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस हादसे को बेहद दुखद और पीड़ादायक बताया है और पीड़ित परिवारों के लिए संवेदना व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि बांध निर्माण कार्य के दौरान हुई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इस मामले में संवेदक समेत तीन लोगों पर प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

सरकार की ओर से मृतक परिवारों को चार-चार लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान और तीन-तीन हजार रुपये कबीर अंत्येष्टि सहायता तत्काल उपलब्ध कराया गया. मंत्री ने कहा कि ईश्वर मृतकों की आत्मा को शांति दें और परिजनों को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें.

पीड़ित परिवारों से मिलने के दौरान जेडीयू नेता शंकर कुशवाहा, नगर परिषद उपाध्यक्ष सुभाष कुमार, भाजपा नेता संजय मिर्धा, पूर्व उपाध्यक्ष हसमत राही और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे.

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Bihar News: चिट्ठी-पार्सल अब ढूंढना होगा आसान, बिहार के हर मकान को मिलेगा डिजिपिन

बिहार के हर मकान को मिलेगा डिजिपिन
बिहार के हर मकान को मिलेगा डिजिपिन

Bihar News: अब बिहार में किसी भी चिट्ठी या पार्सल का पता लगाना आसान हो जाएगा. डाक विभाग ने राज्य के सभी गली-मोहल्लों को डिजिटल लोकेशन से जोड़ने का काम पूरा कर लिया है. इसके तहत प्रत्येक घर को डिजिपिन (डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर) जारी किया जाएगा.

एक करोड़ से ज्यादा मोहल्लों का डिजिटल सर्वे

अधिकारियों के अनुसार, अब तक एक करोड़ से अधिक गली और मोहल्लों की डिजिटल मैपिंग की जा चुकी है. इस तकनीक से हर घर की सटीक लोकेशन दर्ज होगी, जिसे डाकिया मोबाइल से देख सीधे उस पते तक पहुंच सकेगा.

30 डिवीजनों में लागू होगी योजना

बिहार सर्किल के करीब 30 डिवीजन इस परियोजना में शामिल किए गए हैं. फिलहाल पिन कोड व्यवस्था लागू है, लेकिन डिजिपिन के बाद हर घर का अलग डिजिटल कोड होगा. इससे किसी भी इलाके या मोहल्ले में घर तक पहुंचना और आसान होगा.

अधूरे पते से खत्म होगी परेशानी

अब तक आधे-अधूरे पते के कारण बड़ी संख्या में डाक और पार्सल सही जगह नहीं पहुंच पाते थे. आंकड़ों के अनुसार, 45 फीसदी तक डाक गलत पते की वजह से अटक जाती थी और 30-35 फीसदी वापस लौट जाती थी. डिजिपिन लागू होने के बाद यह समस्या खत्म हो जाएगी और हर डाक सही पते पर पहुंचेगी.

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डाक कर्मियों को मिलेगी डिजिटल ट्रेनिंग

राज्य में मौजूद 10 हजार से अधिक डाकियों को इस नई व्यवस्था के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा. इन्हें मोबाइल पर लाइव लोकेशन देखने और डिजिपिन की मदद से पते खोजने का तरीका सिखाया जाएगा. इससे पार्सल और चिट्ठियों की डिलीवरी तेज और सुचारू हो सकेगी.

क्या है डिजिपिन?

डिजिपिन 10 अंकों का यूनिक कोड है, जो डिजिटल एड्रेस सिस्टम पर आधारित है. इसमें हर गली, मोहल्ले और घर को 4 मीटर के दायरे में चिह्नित किया जाता है. इस तकनीक को आईआईटी हैदराबाद और इसरो के एनआरएससी की मदद से डाक विभाग ने विकसित किया है. इसके जरिए अब किसी भी जगह का सटीक डिजिटल पता आसानी से पता लगाया जा सकेगा.

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Jharkhand News : काली कमाई का फर्दाफाश! ठेकेदारों से सालाना 2 करोड़ वसूलता था पीएलएफआई चीफ

पीएलएफआइ सुप्रीमो दिनेश गोप.
पीएलएफआइ सुप्रीमो दिनेश गोप.

Jharkhand News : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में खुलासा हुआ है कि पीएलएफआई का मुखिया दिनेश गोप हर साल करीब दो करोड़ रुपये लेवी के नाम पर वसूलता था. ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी योजनाओं से जुड़े ठेकेदारों से वह दो प्रतिशत की दर से वसूली करता था. सड़क निर्माण, रेल परियोजनाएं, बिल्डिंग निर्माण कार्य के साथ-साथ कोयला, बॉक्साइट, आयरन ओर, बालू और पत्थर के कारोबारियों से भी लेवी वसूल की जाती थी.

राजनीतिक संगठन से नक्सली संगठन तक

ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक, दिनेश गोप ने वर्ष 2004 में झारखंड लिबरेशन टाइगर नामक संगठन का गठन राजनीतिक दल के तौर पर किया था. शुरुआत में इसमें केवल 40 सदस्य थे और यह खूंटी, गुमला, रांची, सिमडेगा समेत आसपास के इलाकों में सक्रिय था. वर्ष 2008 में झारखंड सरकार ने इस संगठन को प्रतिबंधित कर दिया. इसके बाद इसका नाम बदलकर पीएलएफआई रख दिया गया और संगठन को चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, स्टेट प्रेसीडेंट, कमांडर और विभिन्न स्तरों पर पदों में बांटा गया.

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ठेकेदारों पर हमले और आगजनी

ईडी ने अपनी जांच में पाया कि नक्सली संगठन पीएलएफआइ चीफ दिनेश गोप स्थानीय कमांडरों के जरिए लेवी की वसूली करता था. जो ठेकेदार पैसे देने से इंकार करते थे, उनकी परियोजनाओं पर हमला कर दिया जाता था और निर्माण स्थल पर आगजनी की घटनाएं होती थीं. जांच में यह भी सामने आया कि 2008 से 2012 तक गोप हर साल लगभग एक करोड़ रुपये की लेवी वसूलता था, जबकि 2012 से 2020 के बीच यह रकम बढ़कर दो करोड़ रुपये वार्षिक हो गई. यानी इस अवधि में उसने करीब 20 करोड़ रुपये की उगाही की.

शेल कंपनियों के जरिए मनी लाउंड्रिंग

ईडी की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गोप ने अपने सहयोगी सुमंत, पत्नी हीरा देवी और शकुंतला देवी के नाम से कई शेल कंपनियां बनाई थीं. लेवी से जुटाए गए नकद धन को इन्हीं कंपनियों के जरिए बैंक खातों में जमा कराया जाता था. बाद में इन कंपनियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर मनी लाउंड्रिंग की गई.

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Jharkhand : झारखंड में नयी शराब नीति लागू, 1 सितंबर से निजी हाथों में होगी खुदरा बिक्री

झारखंड में नयी शराब नीति लागू
झारखंड में नयी शराब नीति लागू

Jharkhand Liquor Shop : झारखंड सरकार की नई उत्पाद नीति के तहत अब शराब की खुदरा बिक्री निजी हाथों में सौंपी जा रही है. शुक्रवार को पूरे राज्य में दुकानों की लॉटरी प्रक्रिया पूरी की गई, जिससे विभाग को लगभग 40 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ. नई व्यवस्था में कुल 1343 दुकानों को लाइसेंस दिया जाएगा. इनमें 1184 कंपोजिट दुकानें होंगी, जहां देसी और विदेशी दोनों तरह की शराब बिकेगी, जबकि 159 दुकानों पर सिर्फ देसी शराब उपलब्ध रहेगी.

राजधानी रांची में सबसे अधिक 150 दुकानें खोलने की तैयारी है. इस प्रक्रिया में झारखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के कारोबारी भी शामिल हुए.

कीमतों में बदलाव: विदेशी शराब सस्ती, देसी ब्रांड महंगे

नई नीति के लागू होने के साथ शराब की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव होगा. सरकार ने जहां वैट घटाया है, वहीं एक्साइज ड्यूटी और ट्रांसपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है. ऐसे में कई लोकप्रिय ब्रांड की कीमतें 10 से 20 रुपये तक बढ़ेंगी. दूसरी ओर, विदेशों में निर्मित शराब पहले की तुलना में सस्ती हो जाएगी.

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रामगढ़ में 42 दुकानों का लाइसेंस आवंटन

रामगढ़ जिले में 42 शराब दुकानों की बंदोबस्ती की गई. इसके लिए 12 अलग-अलग समूह बनाए गए थे. 20 अगस्त तक आवेदन आमंत्रित किए गए थे और प्रशासन को कुल 178 आवेदन मिले थे. शुक्रवार को ई-लॉटरी के जरिए समूहवार दुकानों का आवंटन किया गया.

हर ग्रुप से अलग-अलग संख्या में आवेदन आए, जिनमें सबसे अधिक 30 आवेदन पहले ग्रुप में और सबसे कम 2 आवेदन छठे ग्रुप में मिले. अब एक सितंबर से चयनित निजी लाइसेंसधारी जिले में खुदरा बिक्री शुरू करेंगे.

गुमला में 57 करोड़ की लॉटरी से बंटी दुकानें

गुमला जिले में समाहरणालय परिसर स्थित उत्पाद विभाग कार्यालय में लॉटरी निकाली गई. यहां दुकानों की बंदोबस्ती 57 करोड़ रुपये में हुई है. अधिकारियों ने बताया कि यह समझौता पांच साल के लिए किया गया है और हर साल इसमें 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी. जिले से कुल 89 आवेदन प्राप्त हुए थे. लॉटरी प्रक्रिया के बाद पांच समूहों का चयन किया गया, जिन्हें पूरे जिले में दुकानों के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है.

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गैंगस्टर मयंक सिंह को अजरबैजान से लाया गया भारत
गैंगस्टर मयंक सिंह को अजरबैजान से लाया गया भारत

Gangster Mayank Singh Video : कुख्यात गैंगस्टर मयंक सिंह को अजरबैजान से प्रत्यर्पित कर शनिवार सुबह झारखंड एटीएस रांची लेकर आई. आतंकवाद निरोधी दस्ता (ATS) की टीम पुलिस अधीक्षक ऋषव कुमार झा के नेतृत्व में विशेष मिशन पर गई थी. दोनों देशों के बीच औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद आरोपी को भारत लाया गया. एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद एटीएस ने उसे सुरक्षा घेरे में लेकर सीधे वाहन में बैठाया. इस पूरी कार्रवाई का एक वीडियो भी सामने आया है.

झारखंड पुलिस के इतिहास में पहली बार सफल प्रत्यर्पण

एटीएस एसपी ऋषव झा ने बताया कि यह झारखंड पुलिस के इतिहास में पहला मौका है, जब किसी अपराधी को विदेश से प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य पुलिस, मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के सहयोग से संभव हो पाई है. अधिकारियों को उम्मीद है कि विदेशों में छिपे बाकी अपराधियों को भी इसी तरह जल्द वापस लाया जाएगा.

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50 से ज्यादा मामलों में वांछित, जानें किस गिरोह से जुड़ाव

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मयंक सिंह पर झारखंड, राजस्थान और पंजाब समेत विभिन्न राज्यों में 50 से अधिक मामले दर्ज हैं. पुलिस के अनुसार वह कुख्यात अमन साहू गिरोह का करीबी माना जाता है और राजस्थान में सक्रिय कई गैंगस्टरों से उसके सीधे संपर्क की बात सामने आई है. एटीएस अधिकारियों का कहना है कि उससे पूछताछ कर अन्य कनेक्शन और आपराधिक नेटवर्क की जानकारी जुटाई जाएगी.

अदालत में पेशी की तैयारी

सूत्रों के अनुसार आरोपी को रामगढ़ की अदालत में पेश किया जाएगा और पुलिस उसकी रिमांड लेने की कोशिश करेगी. बता दें कि मयंक सिंह को अजरबैजान में अक्टूबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था और तब से प्रत्यर्पण प्रक्रिया चल रही थी.

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बिहार के इंटर्न डॉक्टरों का विरोध; 2 दिनों में मांगें नहीं मानी गईं तो ठप होगा कामकाज

इंटर्न डॉक्टरों का विरोध
इंटर्न डॉक्टरों का विरोध

Nalanda Medical College: नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) के इंटर्न डॉक्टरों ने शनिवार को स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर अस्पताल परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया. छात्रों का कहना है कि बिहार में हर तीन साल पर इंटर्नशिप स्टाइपेंड की समीक्षा होनी चाहिए, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी अब तक इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है.

पांच साल से रुका स्टाइपेंड

इंटर्न डॉक्टरों का आरोप है कि उन्हें अब भी वही 20 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड मिल रहा है, जो पांच साल पहले तय किया गया था. उनका कहना है कि पड़ोसी राज्यों में इंटर्न्स को इससे कहीं अधिक राशि दी जा रही है. छात्रों ने मांग की है कि बिहार सरकार तुरंत इसका रिवीजन कर उनके स्टाइपेंड को दोगुना करे.

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सरकार पर लगाया लापरवाही का आरोप

छात्रों का कहना है कि इस मसले को लेकर उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से भी मुलाकात की थी, मगर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. प्रदर्शनकारी इंटर्न्स ने चेतावनी दी है कि अगर दो दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे मंगलवार से अस्पताल की ओपीडी समेत सभी नियमित चिकित्सा सेवाओं का बहिष्कार करेंगे.

प्रशासन सुलह की कोशिश में

अस्पताल प्रबंधन ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत शुरू कर दी है और समाधान निकालने का आश्वासन दिया है. हालांकि छात्रों का रुख अब भी सख्त बना हुआ है.

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Watch Video: वोटर अधिकार यात्रा छोड़ राहुल गांधी खेतों में उतरे, मखाना किसानों से की सीधी बातचीत

राहुल गांधी खेतों में उतरे
राहुल गांधी खेतों में उतरे

Rahul Gandhi Voter Adhikar Yatra: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कटिहार जिले के कुरसेला से वोटर अधिकार यात्रा की शुरुआत की. सुबह उन्होंने कुरसेला स्थित शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि दी और फिर जनसंपर्क यात्रा को आगे बढ़ाया. इस दौरान एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जब राहुल गांधी गाड़ी से उतरकर सीधे मखाना की खेती में पहुंच गए.

खेतों में मौजूद किसानों से उन्होंने हालचाल पूछा और खेती की समस्याओं पर चर्चा की. इस मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें राहुल गांधी किसानों के बीच खड़े होकर उनसे बात करते नजर आ रहे हैं.

जिला कांग्रेस ने संभाली कमान

यात्रा को सफल बनाने के लिए जिला कांग्रेस ने पूरी तैयारी की है. कुरसेला चौक से यात्रा की आधिकारिक शुरुआत को लेकर स्थानीय स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कई बैठकें कीं. जिलाध्यक्ष के आवास को कंट्रोल रूम में बदल दिया गया है, जहां से पूरे अभियान पर नजर रखी जा रही है.

भागलपुर में की सभा, तेजस्वी भी रहे साथ

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इससे पहले शुक्रवार को राहुल गांधी ने मुंगेर से यात्रा की शुरुआत की थी, जो भागलपुर तक पहुंची. भागलपुर घंटाघर चौक पर आयोजित सभा में राहुल गांधी ने जनता को संबोधित किया. इस दौरान प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, भाकपा माले के दीपांकर भट्टाचार्य और वीआईपी अध्यक्ष मुकेश सहनी भी मौजूद रहे. यात्रा के क्रम में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने खानकाह रहमानी जाकर अमीर-ए-शरीअत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी से मुलाकात की.

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