New CJI: देश की न्यायपालिका में एक नए युग की शुरुआत करते हुए, जस्टिस बी.आर. गवई ने भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में पद की शपथ दिलाई, जहां उन्होंने अपनी मां कमलताई गवई आशीर्वाद लिया और उनके पैर छूकर भावुक क्षण साझा किया.
ऐतिहासिक उपलब्धि
- जस्टिस गवई, स्वतंत्रता के बाद देश के दूसरे दलित समुदाय से आने वाले और पहले बौद्ध समुदाय से संबंधित मुख्य न्यायाधीश बने हैं.
- उनका कार्यकाल लगभग छह महीने का होगा, जो 23 दिसंबर 2025 को समाप्त होगा.
- यह उनके परिवार और शुभचिंतकों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था.
मां की प्रतिक्रिया
- जस्टिस गवई की मां कमलताई ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मेरा बेटा डेयरडेविल है, उसे कोई झुका नहीं सकता. वह देश के लोगों को पूरी ईमानदारी से इंसाफ देगा.”
न्यायिक करियर और महत्वपूर्ण फैसले
- जस्टिस गवई ने 1985 में वकालत की शुरुआत की और बॉम्बे हाई कोर्ट के नागपुर बेंच में संवैधानिक और प्रशासनिक मामलों में विशेषज्ञता हासिल की।
- 1990 के बाद, उन्होंने नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और विश्वविद्यालयों सहित कई सरकारी और स्वायत्त निकायों के लिए वकील के रूप में काम किया.
- सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में, उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसलों में भाग लिया, जिनमें शामिल हैं-
- अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखना.
- नोटबंदी (विमुद्रीकरण) की संवैधानिकता को वैध ठहराना.
- एससी कोटे में उप-वर्गीकरण को सही ठहराना.
- के कविता को शराब नीति केस में ज़मानत देना.
- तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की आलोचना.
कार्यकाल:
- जस्टिस गवई का कार्यकाल छह महीने का होगा और 23 दिसंबर 2025 को उनके 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर समाप्त होगा.
- वह वर्तमान सीजेआई खन्ना के बाद सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं.
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