Bhagalpur News : भागलपुर स्थित तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पीजी जूलॉजी विभाग में पीएचडी मेथोडोलॉजी कोर्स के परिणाम को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. विभाग के एक वरीय शिक्षक ने आरोप लगाया है कि पहले अनुत्तीर्ण घोषित किए गए एक छात्र को बाद में अंकों में बदलाव कर पास कर दिया गया. इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे सवाल खड़े हो रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर कई बार पत्राचार के बावजूद निर्णय लंबित है.
तीसरी बार भेजा गया रिमाइंडर, प्रशासन पर सवाल
विभाग के वरीय शिक्षक प्रो इकबाल अहमद ने इस मामले को लेकर प्रभारी कुलपति और परीक्षा नियंत्रक को तीसरी बार रिमाइंडर भेजा है. उन्होंने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय स्तर पर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है. इससे पहले भी वे दो बार लिखित शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक किसी प्रकार की स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई है. वहीं परीक्षा नियंत्रक प्रो विनोद कुमार ओझा का कहना है कि उन्हें पत्र प्राप्त हुआ है और उसे वरीय अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है. आगे की कार्रवाई प्रशासनिक निर्देश के अनुसार होगी.
विभागाध्यक्ष ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर जूलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ धर्मशीला ने लगाए गए आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है. उनका कहना है कि डीन द्वारा पहले पूछे गए सभी सवालों का जवाब दिया जा चुका है और इस विषय पर वे अब और कुछ नहीं कहना चाहती हैं. विभाग की ओर से किसी भी प्रकार की अनियमितता से इनकार किया गया है.
जांच प्रक्रिया अटकी, फाइल लौटी वापस
विश्वविद्यालय के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, इस मामले की फाइल परीक्षा विभाग से रजिस्ट्रार कार्यालय भेजी गई थी, जहां से इसे संबंधित डीन को जांच के लिए अग्रसारित किया गया. हालांकि डीन ने फाइल यह कहते हुए वापस कर दी कि प्रभारी कुलपति के स्पष्ट निर्देश के बिना जांच आगे नहीं बढ़ाई जा सकती. इस वजह से जांच प्रक्रिया फिलहाल ठप पड़ी हुई है.
41 से 56 अंक करने का आरोप, छात्र ने जमा किया सिनोप्सिस
प्रो इकबाल अहमद ने अपने रिमाइंडर पत्र में दावा किया है कि संबंधित छात्र को परीक्षा में 41 अंक मिले थे, जिसे बढ़ाकर 56 कर दिया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा के दौरान कुछ समय के लिए छात्र की कॉपी शिक्षकों ने अपने पास रख ली थी और बाद में वापस दी गई. आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि फरवरी में तैयार परिणाम में छात्र को फेल बताया गया था, जबकि मार्च में जारी परिणाम में उसे पास कर दिया गया. इस बीच संबंधित छात्र ने शोध कार्य के लिए विभाग में अपना सिनोप्सिस भी जमा कर दिया है.
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