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Bihar News : भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में 9वां दीक्षांत समारोह अत्यंत भव्य, अनुशासित और गरिमामय माहौल में आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने की. करपुरी सभागार में सुबह 11 बजे शुरू हुए इस समारोह में राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं को शपथ दिलाते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया. कार्यक्रम की शुरुआत से पहले स्विमिंग पूल का उद्घाटन किया गया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए रुद्राक्ष के पौधे का पौधारोपण भी किया गया.
बड़ी संख्या में पहुंचे अतिथि और शिक्षाविद
समारोह में भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल, राज्यपाल के प्रधान सचिव गोपाल मीणा, बिहार सरकार के विशेष सचिव शैलेन्द्र कुमार, पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विवेकानंद सिंह, बीएयू के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह और कुलसचिव डॉ. मिजानुल हक सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे. इसके अलावा विश्वविद्यालय के वरिष्ठ सदस्य, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य, विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य, डीन, निदेशक, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, छात्र-छात्राएं, उनके अभिभावक और प्रशासनिक अधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए.
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443 छात्रों को उपाधि, 6 को मिला स्वर्ण पदक
इस अवसर पर कुल 443 छात्र-छात्राओं को स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्रियां प्रदान की गईं. इनमें 13 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई. एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर, एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग और एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट जैसे विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्रों को सम्मानित किया गया. साथ ही 6 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया.
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की स्मारिका और वार्षिक प्रतिवेदन 2025-26 का विमोचन किया गया. इसके अलावा सबौर पेयजल संयंत्र का उद्घाटन, नीरा पाउच (अनार और ऑरेंज फ्लेवर) का शुभारंभ और समर्थ ई-गवर्नेंस पोर्टल का लोकार्पण भी किया गया. कार्यक्रम में ग्रीन कैंपस और कृषि अनुसंधान से जुड़ी एआई आधारित फिल्मों का प्रदर्शन भी किया गया.
राज्यपाल ने की जमकर तारीफ, दिया ‘वर्क इज वर्शिप’ का संदेश
राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने अपने विस्तृत संबोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि सबौर में बेहतरीन बुनियादी ढांचा विकसित हो रहा है. उन्होंने कार्यक्रम के अनुशासन और प्रस्तुति को भारतीय सेना के स्तर के अनुरूप बताया और इसकी विशेष प्रशंसा की.
उन्होंने परिसर की स्वच्छता, हरियाली और सुव्यवस्थित व्यवस्था को आदर्श बताते हुए इसे एक उत्कृष्ट ग्रीन कैंपस कहा. राज्यपाल ने “वर्क इज वर्शिप” को जीवन का मूल मंत्र बताते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र से जुड़े छात्र और वैज्ञानिक देश की खाद्य सुरक्षा के सबसे बड़े आधार हैं और यही ताकत भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में मदद करेगी.
चीन मॉडल का जिक्र, कृषि और तकनीक पर जोर
राज्यपाल ने अपने संबोधन में चीन के विकास मॉडल और देंग शियाओपिंग के चार आधुनिकीकरण—कृषि, तकनीकी शिक्षा, उद्योग और सशस्त्र बल—का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को भी इन क्षेत्रों में संतुलित विकास पर ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा कि कृषि केवल एक क्षेत्र नहीं बल्कि हर नागरिक के जीवन से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देना जरूरी है.
मखाना उत्कृष्टता केंद्र पर जोर, सामाजिक संदेश भी दिया
उन्होंने विश्वविद्यालय में “मखाना उत्कृष्टता केंद्र” स्थापित करने की जरूरत पर बल देते हुए इसे समयानुकूल पहल बताया और इसके लिए सहयोग का आश्वासन दिया. उन्होंने ग्रीन कैंपस और प्लास्टिक फ्री कैंपस की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और “प्लास्टिक मुक्त बिहार”, नशा मुक्ति और टीबी उन्मूलन के लिए जागरूकता बढ़ाने की अपील की.
उन्होंने विश्वविद्यालय के मीडिया सेंटर द्वारा बनाई गई शैक्षणिक फिल्मों की भी सराहना की और कहा कि ऐसी फिल्में किसानों और छात्रों तक नई तकनीक पहुंचाने में बेहद उपयोगी हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इन फिल्मों को और व्यापक स्तर पर तैयार किया जाएगा.
सांसद और कुलपति ने गिनाईं उपलब्धियां
सांसद अजय कुमार मंडल ने अपने संबोधन में कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण का उत्सव होता है. उन्होंने छात्रों से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज और देश के विकास में करने की अपील की.
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कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि बीएयू “वर्क इज वर्शिप” और “वर्क विद स्माइल” के सिद्धांत पर लगातार आगे बढ़ रहा है. उन्होंने मखाना-1, मखाना हार्वेस्टर, नई फसल किस्मों, स्टार्टअप, पेटेंट और अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं जैसी उपलब्धियों का जिक्र किया.
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय को NAAC A-ग्रेड मिला है और आईसीएआर से उच्च मान्यता प्राप्त है. साथ ही नीति आयोग ने भी इसे नोडल एजेंसी के रूप में मान्यता दी है. “एक वैज्ञानिक–एक उत्पाद”, जीआई उत्पाद, पलमायरा पाउडर, सिंदूर, ब्लूबेरी और ब्लैकबेरी जैसे नवाचारों की जानकारी भी दी गई.
शिक्षा सुधार और भविष्य की योजना
कुलपति ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शैक्षणिक सुधार लागू किए गए हैं और पुस्तकालय समय को बढ़ाया गया है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य छात्रों और किसानों की समृद्धि के माध्यम से देश के विकास में योगदान देना है. साथ ही 2027-28 तक QS वर्ल्ड रैंकिंग में स्थान बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है.
समारोह के दौरान यह भी बताया गया कि विश्वविद्यालय से प्रशिक्षित किसान आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर बेहतर उत्पादन कर रहे हैं और देशभर में अपनी पहचान बना रहे हैं.
कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं. अंततः यह दीक्षांत समारोह शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.
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