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Vikramshila Bridge collapses : विक्रमशिला सेतु पर हाल ही में हुए स्लैब गिरने की घटना के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. एनएच (राष्ट्रीय उच्च पथ, भागलपुर डिविजन) के कार्यपालक अभियंता साकेत कुमार रौशन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई सेतु का एक हिस्सा गंगा नदी में समा जाने की घटना के बाद की गई है. इस संबंध में पथ निर्माण विभाग के उपसचिव की ओर से आधिकारिक अधिसूचना (नोटिफिकेशन) भी जारी कर दी गई है.
जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि रविवार रात करीब 1.15 बजे भागलपुर से उत्तर बिहार को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु के एक हिस्से के ढहने की घटना के कारणों की समीक्षा की गई. समीक्षा के बाद यह पाया गया कि पुल के रखरखाव और मॉनिटरिंग से जुड़े अभियंताओं की भूमिका की जांच आवश्यक है. इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों को चिह्नित कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया.

जांच में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर की सामने आयी लापरवाही
पथ निर्माण विभाग के आदेश के अनुसार, विक्रमशिला सेतु के रखरखाव और निगरानी की जिम्मेदारी राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर को सौंपी गई थी. इस विभाग के कार्यपालक अभियंता साकेत कुमार रौशन वर्तमान में इस पद पर कार्यरत थे. प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिला है कि उनके स्तर पर कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही और उदासीनता बरती गई, जिसके कारण यह गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई.
निलंबन के बाद मुख्यालय किया तय
आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि अभियंता साकेत रौशन ने अपने दायित्वों के प्रति अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई. इसी आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है. निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय अभियंता प्रमुख, पथ निर्माण विभाग, पटना निर्धारित किया गया है.
निलंबन आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि साकेत कुमार रौशन को निलंबन अवधि के दौरान नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा. विभागीय स्तर पर अब पूरे मामले की विस्तृत जांच की जाएगी, जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि सेतु की संरचनात्मक खामियों और रखरखाव में कहां चूक हुई.
तीन महीने पहले जांच में बॉल-बियरिंग पोजिशन से खिसकने की बात आयी थी सामने
विक्रमशिला सेतु में लंबे समय से बॉल-बियरिंग और स्पैन से जुड़ी तकनीकी समस्याओं की आशंका जताई जा रही थी. विशेषज्ञ टीमों ने पहले भी निरीक्षण के दौरान चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते मरम्मत कार्य नहीं कराया गया, तो संरचनात्मक असंतुलन बढ़ सकता है. इसके बावजूद आवश्यक मरम्मत और सुधारात्मक कार्य समय पर नहीं हो सके.
घटना के बाद प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर कई सवाल खड़े हो गए हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सेतु की स्थिति को लेकर पहले से ही संकेत मिल चुके थे, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई. फिलहाल राज्य सरकार और पथ निर्माण विभाग ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं.
विक्रमशिला सेतु भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण और व्यस्त मार्ग है, जिस पर प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं. ऐसे में इस तरह की घटना ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि इंजीनियरिंग निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं.
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