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बिहार के 11 शहरों में जमीन खरीद-बिक्री पर पाबंदी; शहरी विकास के लिए बड़ा फैसला

बिहार
बिहार के 11 शहरों में जमीन खरीद-बिक्री पर पाबंदी.

Bihar Land News: बिहार में अनियोजित शहरी विस्तार को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है. नगर विकास एवं आवास विभाग ने चुनिंदा शहरी क्षेत्रों में जमीन के लेन-देन और निर्माण गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा दी है. इस निर्णय का असर पटना, मुजफ्फरपुर और गया जैसे प्रमुख शहरों समेत कुल 11 जिलों के संवेदनशील इलाकों में दिखेगा.

सैटेलाइट टाउनशिप की तैयारी

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सरकार इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करना चाहती है. उद्देश्य यह है कि भविष्य में शहरों का विस्तार सुव्यवस्थित ढंग से हो और बुनियादी ढांचे पर अनावश्यक दबाव न पड़े. बिना योजना के निर्माण के कारण ट्रैफिक, जल निकासी और अन्य सुविधाओं पर बढ़ते दबाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.

बिहार के 11 शहरों में जमीन खरीद-बिक्री पर पाबंदी; शहरी विकास के लिए बड़ा फैसला Bihar Land News
जारी निर्देश

कानूनी प्रावधान के तहत निर्णय

यह रोक बिहार शहरी आयोजना एवं विकास अधिनियम, 2012 के प्रावधानों के तहत लागू की गई है. इसके जरिए संबंधित क्षेत्रों के लिए मास्टर प्लान और जोनल प्लान तैयार किए जाएंगे, ताकि विकास की स्पष्ट रूपरेखा तय की जा सके.

निर्धारित समय तक लागू रहेगी पाबंदी

सरकार ने इस रोक के लिए अलग-अलग समयसीमा तय की है. पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर में यह प्रतिबंध 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगा. वहीं मुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर और सीतामढ़ी में यह 30 जून 2027 तक लागू रहेगा.

विकास और रोजगार पर फोकस

सरकार का मानना है कि इन नए टाउनशिप के विकसित होने से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और बड़े शहरों में आबादी का दबाव कम किया जा सकेगा. साथ ही लोगों को बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का रास्ता भी साफ होगा.

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Bihar News : नए सत्र से पहले किताबें देने की तैयारी, बिहार में मुफ्त पाठ्य-पुस्तक योजना पर तेजी

भागलपुर
नए सत्र से पहले किताबें देने की तैयारी.

Bihar News : बिहार में स्कूली शिक्षा को लेकर एक अहम पहल शुरू की गई है, जिसके तहत आने वाले शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को समय पर निःशुल्क किताबें उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है. इसको लेकर बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने सभी जिलों को जरूरी दिशा-निर्देश भेज दिए हैं, ताकि सत्र शुरू होते ही छात्रों को पढ़ाई में किसी तरह की परेशानी न हो.

समय पर वितरण को लेकर सख्त निर्देश

राज्य परियोजना निदेशक नवीन कुमार ने जिलों के शिक्षा पदाधिकारियों और डीपीओ (एसएसए) को निर्देश दिया है कि पुस्तकों की आपूर्ति पहले महीने में ही सुनिश्चित की जाए. इसके लिए हर जिले से प्रखंड और कक्षा के अनुसार सटीक मांग मांगी गई है. यह भी तय किया गया है कि सभी जिलों को 5 मई तक यह जानकारी हर हाल में उपलब्ध करानी होगी.

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कई श्रेणी के स्कूलों के छात्रों को मिलेगा लाभ

इस योजना के अंतर्गत राज्य के विभिन्न प्रकार के विद्यालयों के बच्चों को किताबें दी जाएंगी. इनमें सरकारी स्कूल, सहायता प्राप्त विद्यालय, अनुदानित मदरसे और संस्कृत विद्यालय शामिल हैं. इसके अलावा कल्याण विभाग के तहत संचालित एससी, एसटी, ओबीसी और ईबीसी वर्ग के स्कूलों के साथ-साथ अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों के लिए चलने वाले संस्थान भी इसमें शामिल किए गए हैं.

सटीक मांग पर जोर

विभाग का उद्देश्य है कि सत्र शुरू होते ही पढ़ाई निर्बाध रूप से शुरू हो सके. पहले कई बार देखा गया कि मांग देर से भेजे जाने के कारण किताबों के वितरण में देरी हो जाती थी. इस बार इस समस्या से बचने के लिए समयसीमा तय कर दी गई है और अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे नामांकन के संभावित आंकड़ों के आधार पर सही मांग भेजें, ताकि न तो किताबों की कमी हो और न ही अतिरिक्त छपाई के कारण बर्बादी.

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बिहार के विश्वविद्यालयों में प्रतिकुलपति बहाली की तैयारी, लंबे समय से खाली पदों पर होगी नियुक्ति

टीएमबीयू
तिलकामांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी.

Bihar News : राज्य के विश्वविद्यालयों में खाली पड़े प्रतिकुलपति पदों को भरने की कवायद तेज होने जा रही है. कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने इस दिशा में प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा निर्धारित मानकों को लागू किया जाएगा, लेकिन जब तक इन मानकों को पूरी तरह अपनाया नहीं जाता, तब तक बहाली पटना विश्वविद्यालय अधिनियम और बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 के प्रावधानों के तहत ही की जाएगी.

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लंबे समय से खाली हैं अहम पद

प्रदेश के अधिकांश पारंपरिक विश्वविद्यालयों में प्रतिकुलपति का पद काफी समय से रिक्त है. तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में यह पद वर्ष 2021 से खाली पड़ा है. उस समय इस पद पर प्रोफेसर रमेश कुमार कार्यरत थे, जिनका कार्यकाल पूरा होने के बाद नए प्रतिकुलपति की नियुक्ति नहीं हो सकी.

अस्थायी व्यवस्था से चल रहा काम

पद खाली रहने की स्थिति में विश्वविद्यालयों में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत काम चलाया जा रहा है. जब कुलपति मुख्यालय से बाहर रहते हैं, तो वरिष्ठ शिक्षक को नियमित कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी जाती रही है. अब नई नियुक्तियों के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को स्थायी रूप देने की उम्मीद जताई जा रही है.

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बिहार में सूने घर पर बड़ा हाथ, करोड़ के करीब गहने और नकदी उड़ाकर फरार हुए बदमाश

बिहार में लूट
सांकेतिक तस्वीर.

Bihar Crime News : औरंगाबाद जिले के दाउदनगर इलाके में शुक्रवार रात एक बड़ी चोरी की घटना ने लोगों को चौंका दिया. भखरुआं तिवारी मोहल्ला स्थित एक बंद पड़े मकान को निशाना बनाकर अज्ञात चोरों ने लाखों के जेवर और नगदी पर हाथ साफ कर दिया. घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है.

घटना स्थल और तरीका

बताया जा रहा है कि यह वारदात दाउदनगर-औरंगाबाद रोड पर एक मकान में हुई, जो मुख्य सड़क से थोड़ी दूरी पर स्थित है. घर खाली होने का फायदा उठाकर चोर अंदर घुसे और पूरे घर को खंगाल डाला. सूचना मिलते ही पुलिस देर रात मौके पर पहुंची और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू की.

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परिवार बाहर, घर बना आसान निशाना

मकान मालिक अपनी पत्नी के साथ रांची गए हुए थे, जिससे घर पूरी तरह खाली था. इसी दौरान चोरों ने मौका देखकर वारदात को अंजाम दिया. मामले की शिकायत उनके भाई की ओर से थाने में दर्ज कराई गई है.

कीमती गहने और कैश गायब

शिकायत के अनुसार, घर से भारी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण चोरी हुए हैं. इनमें चेन, हार, कंगन, अंगूठियां, झुमके और अन्य जेवर शामिल हैं, जिनका कुल वजन करीब आधा किलो बताया गया है. इनकी कीमत लगभग 75 लाख रुपए आंकी गई है. इसके अलावा करीब एक लाख रुपए नकद भी गायब हैं.

अलमारी-बक्से तोड़कर की तलाशी

चोरों ने घर के अंदर रखे हर संभावित स्थान को खंगाला. अलमारी, बक्से और अन्य सामान को तोड़कर कीमती वस्तुओं की तलाश की गई. घर के अंदर फैली अव्यवस्था से साफ है कि बदमाशों ने आराम से समय लेकर चोरी की.

जांच में जुटी पुलिस

घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि आसपास के क्षेत्रों में सुराग तलाशे जा रहे हैं और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.

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पटना परीक्षा केंद्र पर बड़ा खुलासा, BPSC एग्जाम में आंसर की खेल; अभ्यर्थी और महिला सुपरवाइजर अरेस्ट

पटना
सांकेतिक तस्वीर.

Bihar News: पटना के एएन कॉलेज स्थित परीक्षा केंद्र पर आयोजित बीपीएससी परीक्षा के दौरान संदिग्ध गतिविधियों ने हड़कंप मचा दिया. सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी पद के लिए चल रही परीक्षा में एक परीक्षार्थी और एक महिला कर्मी को संदेह के आधार पर पकड़ा गया. प्रारंभिक जांच में जो बातें सामने आईं, उन्होंने पूरे घटनाक्रम को गंभीर बना दिया और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए.

अभ्यर्थी के पास मिली समान सीरीज की सामग्री

नालंदा जिले के मानपुर निवासी रौशन कुमार को हिरासत में लिया गया. जांच के दौरान उसके पास से ऐसी सामग्री बरामद हुई, जिसकी सीरीज उसी प्रश्नपत्र से मेल खा रही थी, जो उसे परीक्षा में दिया गया था. इस तथ्य ने यह आशंका बढ़ा दी कि परीक्षा के दौरान ही किसी तरह की सहायता उपलब्ध कराई गई हो सकती है.

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महिला कर्मी की भूमिका पर सवाल

वैशाली की रहने वाली अंशु प्रिया, जो परीक्षा केंद्र पर एक निजी एजेंसी के माध्यम से तैनात थी, को भी इस मामले में पकड़ा गया. वह सुपरविजन और बायोमेट्रिक कार्य से जुड़ी हुई थी. उस पर आरोप है कि उसने परीक्षार्थी तक संदिग्ध सामग्री पहुंचाने में भूमिका निभाई, हालांकि उसने इन आरोपों से इनकार किया है.

निरीक्षण के दौरान खुला मामला

परीक्षा ड्यूटी पर मौजूद वीक्षकों ने संदिग्ध हरकतें देखते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया और दोनों को रोक लिया. इसके बाद केंद्र प्रभारी को जानकारी दी गई और आवश्यक कार्रवाई करते हुए पुलिस को सौंप दिया गया. इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.

लीक या अंदरूनी गड़बड़ी, जांच जारी

बरामद सामग्री और उसकी सीरीज को देखते हुए जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं प्रश्नपत्र पहले से बाहर तो नहीं हुआ था या फिर परीक्षा के दौरान ही कोई चूक हुई. इस एंगल से भी जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है.

डिजिटल जांच और पूछताछ

दोनों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं और उनकी तकनीकी जांच की जा रही है. अलग-अलग पूछताछ में दोनों ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है.

दूसरे केंद्र पर भी कार्रवाई

शास्त्रीनगर इलाके के एक अन्य परीक्षा केंद्र से भी अनियमितता का मामला सामने आया, जहां एक परीक्षार्थी को संदिग्ध सामग्री के साथ पकड़ा गया. एक अन्य व्यक्ति मौके से भागने में सफल रहा. पुलिस ने इस मामले में भी अलग से केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है.

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परंपरा टूटी, ‘विधायक’ मुख्यमंत्री ने पेश किया विश्वास मत; बिहार की सियासत में नया मोड़

CM Samrat Choudhary
बिहार के नये सीएम सम्राट चौधरी.

Samrat Chaudhary : पटना में सियासी घटनाक्रम के बीच शुक्रवार को एक लंबे अंतराल के बाद ऐसा मौका आया जब सम्राट चौधरी ने विधायक रहते हुए मुख्यमंत्री के तौर पर सदन में विश्वास मत का प्रस्ताव पेश किया. इससे पहले राज्य की राजनीति में लंबे समय तक ऐसे उदाहरण अधिक रहे हैं, जब मुख्यमंत्री विधान परिषद के सदस्य के रूप में पद पर बने रहे. इस संदर्भ में नीतीश कुमार का नाम सबसे प्रमुख है, जिन्होंने वर्षों तक परिषद सदस्य रहते हुए ही मुख्यमंत्री पद संभाला और कई बार शपथ ली.

नीतीश कुमार का अनोखा रिकॉर्ड

नवंबर 2005 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के समय नीतीश कुमार लोकसभा के सदस्य थे. इसके बाद 2006 में उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता ली. इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद की कुल 10 बार शपथ ली, जिनमें अधिकांश बार वे विधान परिषद सदस्य ही रहे. 2014 में कुछ महीनों के लिए जब उन्होंने पद छोड़ा, तब जीतनराम मांझी मुख्यमंत्री बने और उस समय वे विधायक थे.

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1968 से शुरू हुआ सिलसिला

बिहार में विधायक के बजाय विधान परिषद सदस्य के मुख्यमंत्री बनने की परंपरा की शुरुआत फरवरी 1968 में हुई थी. उस समय वीपी मंडल, जो मधेपुरा से सांसद थे, मुख्यमंत्री बनने के बाद विधान परिषद के सदस्य बने. इसके बाद कांग्रेस के कई नेताओं ने भी इसी तरह मुख्यमंत्री पद संभाला, जिनमें भोला पासवान शास्त्री, चंद्रशेखर सिंह, भागवत झा आजाद और सत्येंद्र नारायण सिन्हा शामिल रहे.

लालू-राबड़ी के दौर में भी दिखा यही ट्रेंड

1989 में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र विधायक थे. इसके बाद 1990 में जनता दल के नेता लालू प्रसाद मुख्यमंत्री बने, उस समय वे सांसद थे और उनका पहला कार्यकाल विधान परिषद सदस्य के रूप में बीता. 1995 में विधायक बनने के बाद उनका दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ. इसी तरह राबड़ी देवी को भी मुख्यमंत्री रहते हुए विधान परिषद और विधानसभा, दोनों तरह की सदस्यता के साथ काम करने का अवसर मिला.

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उत्तर भारत में ‘भट्ठी’ जैसे हालात, पारा 45°C पार; IMD का अलर्ट—कहीं लू, कहीं तूफानी बारिश

मौसम
लू का अलर्ट जारी, सांकेतिक तस्वीर.

Weather Alert : उत्तर भारत में तेज गर्मी ने हालात मुश्किल कर दिए हैं और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए चेतावनी जारी की है. उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों और मध्य भारत में तापमान लगातार बढ़ रहा है, जहां कई जगहों पर पारा 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है. अगले तीन से चार दिनों तक लू चलने की आशंका जताई गई है, जिससे दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म बनी रहेंगी. वहीं दूसरी ओर, पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश और तेज तूफान का पूर्वानुमान जारी किया गया है, जिससे मौसम का अलग ही रूप देखने को मिल सकता है.

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ी गर्मी की मार

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में गर्मी का असर लगातार तेज हो रहा है. मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान 41 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है. 25 से 27 अप्रैल के दौरान लू के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. न्यूनतम तापमान भी 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है, जिससे रात में भी राहत मिलने की संभावना कम है.

उत्तर प्रदेश में लू का असर

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी दोनों हिस्सों में गर्मी का प्रकोप देखने को मिलेगा. राज्य के कई इलाकों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. मौसम विभाग ने 24 से 27 अप्रैल के बीच पश्चिमी और पूर्वी यूपी के लिए हीट वेव का अलर्ट जारी किया है.

अन्य राज्यों में मौसम का हाल

राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में अगले चार दिनों तक लू चलने की चेतावनी दी गई है और तापमान सामान्य से ऊपर रहने का अनुमान है. बिहार में 24 और 25 अप्रैल को लू का प्रभाव रहेगा, जबकि 26 और 27 अप्रैल को तेज हवाओं के साथ बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी तापमान में वृद्धि के साथ हीट वेव की स्थिति बनी हुई है. उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में गर्मी का असर है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भी तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है.

दक्षिण और पूर्वोत्तर में बदला मौसम

दक्षिण भारत के केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु में उमस भरी गर्मी के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है. 28 अप्रैल तक इन राज्यों में तेज हवाएं, बिजली गिरने और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया गया है. वहीं पूर्वोत्तर के असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में व्यापक वर्षा का अनुमान है. कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं और बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है.

अरुणाचल प्रदेश और असम-मेघालय में 25 से 30 अप्रैल के बीच अत्यधिक बारिश की चेतावनी दी गई है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है.

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राघव का वार, ‘आप’ लाचार; 10 में 7 सांसदों ने एक साथ छोड़ा साथ, सत्ता का गणित बदला

आप
आप के 7 सांसदों ने एक साथ छोड़ा साथ.

Aam Aadmi Party: राष्ट्रीय राजनीति में शुक्रवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने एक साथ पार्टी से अलग होने का फैसला किया और भारतीय जनता पार्टी(BJP) में शामिल हो गए. इस घटनाक्रम ने न सिर्फ संसद में पार्टी की ताकत को प्रभावित किया, बल्कि संगठन के भीतर चल रही खींचतान को भी खुलकर सामने ला दिया.

पार्टी छोड़ने वालों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी के नाम प्रमुख हैं. एक साथ इतने सांसदों के जाने से पार्टी की संसदीय उपस्थिति में अचानक कमी आई है और इसे अब तक का सबसे बड़ा संगठनात्मक झटका माना जा रहा है.

राज्यसभा में घटा आंकड़ा, दो-तिहाई समूह के अलग होने का दावा

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान राघव चड्ढा(Raghav Chadha) ने मीडिया के सामने कहा कि यह फैसला व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक है. उनके साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मौजूद रहे. उन्होंने बताया कि राज्यसभा में पार्टी के दो-तिहाई सांसदों ने एक साथ अलग होने का निर्णय लिया है और अब वे एक समूह के रूप में नई राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. इस कदम के बाद संसद में पार्टी की संख्या घटकर सीमित रह गई है, जिसमें अब लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर कुल छह सदस्य ही बचे हैं.

अलग-अलग पृष्ठभूमि, एक जैसा फैसला

पार्टी छोड़ने वाले सभी नेताओं की पृष्ठभूमि अलग-अलग रही है, लेकिन इस बार उनका निर्णय एक जैसा रहा. स्वाति मालीवाल, जो हाल के वर्षों में पार्टी नेतृत्व को लेकर मुखर रही थीं, पहले ही अपने बयान से असहमति जता चुकी थीं. वहीं संदीप पाठक ने शिक्षा और संगठन दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी जैसे नाम भी अलग-अलग समय पर पार्टी से जुड़े, लेकिन अंततः सभी ने एक साथ अलग होने का रास्ता चुना.

दिल्ली चुनाव 2025 के बाद बढ़ती गई असहमति

फरवरी 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पार्टी के भीतर असंतोष को और बढ़ा दिया था. चुनाव में हार के बाद संगठन के फैसलों, नेतृत्व की रणनीति और राजनीतिक दिशा को लेकर सवाल उठने लगे थे. लगातार सामने आ रही इन चर्चाओं ने धीरे-धीरे एक बड़े संकट का रूप ले लिया. अब वही असंतोष खुलकर सामने आया है, जिसने पार्टी की एकजुटता पर असर डाला है.

BJP में शामिल होने से बदला राजनीतिक संदेश

घोषणा के कुछ ही समय बाद राघव चड्ढा(Raghav Chadha) ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह कदम पहले से तय रणनीति का हिस्सा था. उनके साथ अन्य नेताओं का भी उसी दिशा में जाना इस पूरे घटनाक्रम को और अहम बनाता है. इससे राजधानी की राजनीति में नई स्थिति बनी है और आने वाले समय में इसके दूरगामी असर की संभावना जताई जा रही है.

कांग्रेस ने साधा निशाना, उठाए सवाल

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई. पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने तीखी टिप्पणी करते हुए आम आदमी पार्टी(AAP) और भाजपा(BJP) के बीच अंतर पर सवाल उठाए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब यह देखना बाकी है कि अरविंद केजरीवाल आगे क्या रुख अपनाते हैं. इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है.

स्थापना के बाद सबसे बड़ा संकट

करीब 14 साल पहले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उभरी आम आदमी पार्टी के लिए यह घटनाक्रम एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है. राज्यसभा के अधिकांश सदस्यों के एक साथ जाने से पार्टी की संगठनात्मक मजबूती और नेतृत्व क्षमता दोनों पर सवाल खड़े हुए हैं. यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब पार्टी आने वाले चुनावों में अपनी रणनीति को मजबूत करने में लगी हुई थी. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस संकट के बाद पार्टी खुद को किस तरह पुनर्गठित करती है.

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AAP में बड़ी टूट: राघव चड्ढा ने थामा बीजेपी का दामन, राज्यसभा के कई सांसद भी हुए साथ

राघव चड्ढा
राघव चड्ढा ने थामा बीजेपी का दामन.

Raghav Chadha Joins BJP: आम आदमी पार्टी को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा, जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने का ऐलान करते हुए भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा कर दी. मीडिया से बातचीत में चड्ढा ने कहा कि उन्होंने पार्टी को वर्षों तक मेहनत से खड़ा किया, लेकिन अब यह अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ समय से उन्हें महसूस हो रहा था कि वह गलत पार्टी में सही व्यक्ति हैं. गौरतलब है कि हाल ही में उन्हें राज्यसभा में AAP के उपनेता पद से हटा दिया गया था, जिसके बाद से उनके रुख में बदलाव साफ नजर आ रहा था.

बीजेपी मुख्यालय में हुआ स्वागत, सांसदों ने किया विलय का दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी नेतृत्व से मुलाकात की. इस दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी भेंट हुई. जानकारी के अनुसार, राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सांसदों ने भाजपा में शामिल होने का दावा किया. मुख्यालय में सभी का स्वागत मिठाई खिलाकर किया गया.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चड्ढा ने एक पोस्ट में बताया कि संविधान के प्रावधानों के तहत AAP के दो-तिहाई से अधिक राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हो गए हैं. उन्होंने लिखा कि सात सांसदों ने इस संबंध में दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, जिन्हें राज्यसभा के सभापति को सौंपा गया है. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने स्वयं दो अन्य सांसदों के साथ हस्ताक्षरित दस्तावेज जमा किए हैं.

AAP पर बीजेपी का हमला, ‘एक व्यक्ति की पार्टी’ बताया

AAP के राज्यसभा सांसदों के इस कदम के बाद भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि AAP अब एक व्यक्ति विशेष की पार्टी बनकर रह गई है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पार्टी को आत्ममंथन करने की जरूरत है, लेकिन वह अपनी कमियों को नजरअंदाज कर रही है. पूनावाला ने पंजाब से जुड़े मुद्दों और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भी AAP पर सवाल उठाए.

‘पार्टी अब जनता के लिए नहीं’—चड्ढा का आरोप

पार्टी छोड़ने के बाद राघव चड्ढा ने AAP नेतृत्व पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी अब देशहित से भटक चुकी है और अपने फायदे के लिए काम कर रही है. उन्होंने कहा कि वह अब जनता के साथ सीधे जुड़कर काम करना चाहते हैं. इस दौरान संदीप पाठक ने भी कहा कि उन्होंने लंबे समय तक पार्टी के साथ काम किया, लेकिन परिस्थितियों के चलते अब अलग होने का निर्णय लिया है.

केजरीवाल और भगवंत मान का पलटवार

AAP में इस टूट के बाद पार्टी नेतृत्व ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए. पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भाजपा ने एक बार फिर पंजाब के लोगों के साथ विश्वासघात किया है. वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों को ‘गद्दार’ बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा AAP को तोड़ने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि जब उनके खिलाफ कुछ नहीं मिला तो पार्टी को कमजोर करने की रणनीति अपनाई गई.

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बीएयू सबौर का भव्य दीक्षांत, 443 छात्रों को डिग्री—महामहिम ने कृषि और तकनीक पर दिया बड़ा विजन

बीएयू सबौर
बीएयू सबौर का भव्य दीक्षांत समारोह.

Bihar News : भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में 9वां दीक्षांत समारोह अत्यंत भव्य, अनुशासित और गरिमामय माहौल में आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने की. करपुरी सभागार में सुबह 11 बजे शुरू हुए इस समारोह में राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं को शपथ दिलाते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया. कार्यक्रम की शुरुआत से पहले स्विमिंग पूल का उद्घाटन किया गया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए रुद्राक्ष के पौधे का पौधारोपण भी किया गया.

बड़ी संख्या में पहुंचे अतिथि और शिक्षाविद

समारोह में भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल, राज्यपाल के प्रधान सचिव गोपाल मीणा, बिहार सरकार के विशेष सचिव शैलेन्द्र कुमार, पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विवेकानंद सिंह, बीएयू के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह और कुलसचिव डॉ. मिजानुल हक सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे. इसके अलावा विश्वविद्यालय के वरिष्ठ सदस्य, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य, विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य, डीन, निदेशक, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक, छात्र-छात्राएं, उनके अभिभावक और प्रशासनिक अधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए.

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443 छात्रों को उपाधि, 6 को मिला स्वर्ण पदक

इस अवसर पर कुल 443 छात्र-छात्राओं को स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्रियां प्रदान की गईं. इनमें 13 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई. एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर, एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग और एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट जैसे विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्रों को सम्मानित किया गया. साथ ही 6 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया.

समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की स्मारिका और वार्षिक प्रतिवेदन 2025-26 का विमोचन किया गया. इसके अलावा सबौर पेयजल संयंत्र का उद्घाटन, नीरा पाउच (अनार और ऑरेंज फ्लेवर) का शुभारंभ और समर्थ ई-गवर्नेंस पोर्टल का लोकार्पण भी किया गया. कार्यक्रम में ग्रीन कैंपस और कृषि अनुसंधान से जुड़ी एआई आधारित फिल्मों का प्रदर्शन भी किया गया.

राज्यपाल ने की जमकर तारीफ, दिया ‘वर्क इज वर्शिप’ का संदेश

राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने अपने विस्तृत संबोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि सबौर में बेहतरीन बुनियादी ढांचा विकसित हो रहा है. उन्होंने कार्यक्रम के अनुशासन और प्रस्तुति को भारतीय सेना के स्तर के अनुरूप बताया और इसकी विशेष प्रशंसा की.

उन्होंने परिसर की स्वच्छता, हरियाली और सुव्यवस्थित व्यवस्था को आदर्श बताते हुए इसे एक उत्कृष्ट ग्रीन कैंपस कहा. राज्यपाल ने “वर्क इज वर्शिप” को जीवन का मूल मंत्र बताते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र से जुड़े छात्र और वैज्ञानिक देश की खाद्य सुरक्षा के सबसे बड़े आधार हैं और यही ताकत भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में मदद करेगी.

चीन मॉडल का जिक्र, कृषि और तकनीक पर जोर

राज्यपाल ने अपने संबोधन में चीन के विकास मॉडल और देंग शियाओपिंग के चार आधुनिकीकरण—कृषि, तकनीकी शिक्षा, उद्योग और सशस्त्र बल—का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को भी इन क्षेत्रों में संतुलित विकास पर ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा कि कृषि केवल एक क्षेत्र नहीं बल्कि हर नागरिक के जीवन से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देना जरूरी है.

मखाना उत्कृष्टता केंद्र पर जोर, सामाजिक संदेश भी दिया

उन्होंने विश्वविद्यालय में “मखाना उत्कृष्टता केंद्र” स्थापित करने की जरूरत पर बल देते हुए इसे समयानुकूल पहल बताया और इसके लिए सहयोग का आश्वासन दिया. उन्होंने ग्रीन कैंपस और प्लास्टिक फ्री कैंपस की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और “प्लास्टिक मुक्त बिहार”, नशा मुक्ति और टीबी उन्मूलन के लिए जागरूकता बढ़ाने की अपील की.

उन्होंने विश्वविद्यालय के मीडिया सेंटर द्वारा बनाई गई शैक्षणिक फिल्मों की भी सराहना की और कहा कि ऐसी फिल्में किसानों और छात्रों तक नई तकनीक पहुंचाने में बेहद उपयोगी हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इन फिल्मों को और व्यापक स्तर पर तैयार किया जाएगा.

सांसद और कुलपति ने गिनाईं उपलब्धियां

सांसद अजय कुमार मंडल ने अपने संबोधन में कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण का उत्सव होता है. उन्होंने छात्रों से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज और देश के विकास में करने की अपील की.

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कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि बीएयू “वर्क इज वर्शिप” और “वर्क विद स्माइल” के सिद्धांत पर लगातार आगे बढ़ रहा है. उन्होंने मखाना-1, मखाना हार्वेस्टर, नई फसल किस्मों, स्टार्टअप, पेटेंट और अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं जैसी उपलब्धियों का जिक्र किया.

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय को NAAC A-ग्रेड मिला है और आईसीएआर से उच्च मान्यता प्राप्त है. साथ ही नीति आयोग ने भी इसे नोडल एजेंसी के रूप में मान्यता दी है. “एक वैज्ञानिक–एक उत्पाद”, जीआई उत्पाद, पलमायरा पाउडर, सिंदूर, ब्लूबेरी और ब्लैकबेरी जैसे नवाचारों की जानकारी भी दी गई.

शिक्षा सुधार और भविष्य की योजना

कुलपति ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शैक्षणिक सुधार लागू किए गए हैं और पुस्तकालय समय को बढ़ाया गया है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य छात्रों और किसानों की समृद्धि के माध्यम से देश के विकास में योगदान देना है. साथ ही 2027-28 तक QS वर्ल्ड रैंकिंग में स्थान बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है.

समारोह के दौरान यह भी बताया गया कि विश्वविद्यालय से प्रशिक्षित किसान आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर बेहतर उत्पादन कर रहे हैं और देशभर में अपनी पहचान बना रहे हैं.

कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं. अंततः यह दीक्षांत समारोह शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.

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