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Bihar News: भागलपुर में अतिक्रमण रोकेगा मंदिर की दीवार, शुरू होगी सरकारी पैसों से घेराबंदी

Bihar News: भागलपुर के प्रमुख मंदिर परिसरों की अब सरकारी खर्चे पर सुरक्षा घेराबंदी की जाएगी. जिला प्रशासन ने चार मंदिरों को अतिक्रमण और तोड़फोड़ से बचाने के लिए चारदीवारी और गेट निर्माण की योजना को मंजूरी दी है. पहले चरण में करीब 80 लाख रुपये की लागत से यह कार्य तीन माह में पूरा किया जाएगा.

Bihar News: भागलपुर जिले के चार प्रमुख मंदिर परिसरों की अब सरकारी खर्चे पर सुरक्षा घेराबंदी की जाएगी. जिला प्रशासन ने मंदिरों की भूमि को अतिक्रमण, अवैध निर्माण और तोड़फोड़ से बचाने के लिए चारदीवारी और गेट निर्माण की योजना को मंजूरी दे दी है. पहले चरण में जिले के तीन प्रखंडों के चार मंदिरों को इस योजना में शामिल किया गया है. इसके लिए कुल 80 लाख 57 हजार 800 रुपये की राशि स्वीकृत की गई है. कार्य को तीन माह की समयसीमा में पूरा करना अनिवार्य होगा.

कहलगांव, नाथनगर और गोराडीह के मंदिरों की होगी सुरक्षा घेराबंदी

चारदीवारी निर्माण की यह योजना कहलगांव, नाथनगर और गोराडीह प्रखंड के चार मंदिर परिसरों में लागू की जा रही है. इसमें कहलगांव के रामजानकी त्रिमुहान मंदिर (18.23 लाख रुपये), मथुरापुर स्थित भगवती स्थान मंदिर (15.65 लाख), नाथनगर के नसरतखानी मंदिर (24.99 लाख) और गोराडीह के कबीरमठ मंदिर (21.71 लाख रुपये) शामिल हैं. रामजानकी त्रिमुहान मंदिर पूरी तरह खुले में है. मंदिर के महंत जितेंद्र नारायण सिंह ने बताया कि यह मंदिर आसपास के आधा दर्जन गांवों के लिए आस्था का केंद्र है, लेकिन अब तक इसकी सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था.

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यहां दिया जायेगा सुरक्षा घेरा

1.कहलगांव-

रामजानकी त्रिमुहान मंदिर: 18.23 लाख रुपये-मथुरापुर भगवती स्थान मंदिर: 15.65 लाख रुपये

2. नाथनगर

नसरतखानी मंदिर : 24.99 लाख रुपये

3. गोराडीह-

कबीरमठ मंदिर : 21.71 लाख रुपये

एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू, जुलाई से होगा कार्य प्रारंभ

स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल-01, भागलपुर ने इन चारों मंदिरों के लिए प्रस्ताव तैयार कर भेजा था, जिसे मंजूरी मिल चुकी है. विभाग ने निर्माण कार्य के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. 10 जुलाई को तकनीकी बिड खोली जाएगी. उसके बाद फाइनेंसियल बिड के आधार पर ठेकेदार एजेंसी का चयन किया जाएगा और फिर उन्हें कार्य आदेश (वर्क ऑर्डर) जारी किया जाएगा.

सात साल बाद फिर शुरू हो रहा है घेराबंदी का काम

विभाग के अनुसार, इससे पहले करीब सात वर्ष पूर्व तीन मंदिर परिसरों की चहारदीवारी बनाई गई थी. उसके बाद से इस दिशा में कोई नया कार्य स्वीकृत नहीं हुआ था. अब एक बार फिर मंदिर परिसरों की सुरक्षा के लिए प्रयास शुरू हुए हैं. विभाग ने जिले के तीन अन्य मंदिरों को भी चिह्नित किया है, जिनका प्रस्ताव तैयार है और एनओसी की जांच प्रक्रिया चल रही है. जैसे ही स्वीकृति मिलेगी, वहां भी निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

चहारदीवारी से होंगे कई लाभ

मंदिर परिसरों की चारदीवारी से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मंदिर की भूमि पर किसी भी तरह के अतिक्रमण या अवैध निर्माण की गुंजाइश नहीं रहेगी. साथ ही, मंदिर परिसरों की परिसीमन स्पष्ट हो जाएगी. इससे मूर्तियों, दानपात्रों और अन्य सामग्री की चोरी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी रोकी जा सकेंगी. भीड़भाड़ वाले मौकों पर सीमित प्रवेश और निगरानी संभव होगी, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा बढ़ेगी.

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